सेवा का सच्चा अर्थ

▶भगवद् गीता में भगवान कृष्ण ने कहा है- न हि कश्चित्क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत्| कार्यते ह्यवशः कर्म सर्वः प्रकृतिजैर्गुणैः

     इसका अर्थ यह है कि इस संसार में कोई भी व्यक्ति कर्म किए बिना नहीं रह सकता है। हमें कोई न कोई कर्म तो करना ही होगा। और हम जो भी कर्म करें, उसमें अपने विवेक का इस्तेमाल जरूर करें। हमें सिर्फदिमाग से आ रही तरंगों से ही निर्देशित नहीं होना चाहिए। अगर आप इस संसार में आए हैं तो कुछ ऐसा करें जो कि हर किसी के लिए कल्याणकारी हो। सिर्फ इसी सोच में न अटके रहें कि इससे आपको मिलेगा क्या? इस स्थूल संसार में ऐसा कुछ भी नहीं है जो कि आप अपने साथ लेकर जाएंगे।

आप सिर्फ कुछ देने के लिए यहां पर आए हैं। आप कुछ ऐसा करने के लिए आए हैं जो सबके लिए कल्याणकारी हो। और सेवा करने में आप सबको एकजुट हो जाना चाहिए। यह शिकायत न करें कि- ‘सेवा करने में मुझे कोई आनंद नहीं आता है।’ आनंद प्राप्त करने या किसी अन्य प्रकार की संतुष्टि हासिल करने के लिए सेवा करना जीवन की बहुत ही छोटी साेच होती है।

अगर आप सिर्फ इसलिए सेवा कर रहे हैं, क्योंकि इससे आपको इसमें किसी तरह का आनंद या मजा आता है तो आप लंबे समय तक इसमें नहीं लगे रह सकते। आप सिर्फ इसलिए सेवा में आए हैं, क्योंकि आपको यह करना है। अगर आप सिर्फ आनंद के लिए सेवा कर रहे हैं तो आप स्वार्थी हैं। आपने यह लघुकथा पहले भी सुनी होगी। एक बार एक महिला ने पादरी से पूछा- ‘सेवा का मतलब क्या है?’ जवाब में पादरी ने कहा, ‘मान लीजिए, आपने देखा कि एक बूढ़ी औरत बेहद व्यस्त सड़क अकेले ही पार करने की कोशिश कर रही है।

सड़क पार करने में उस महिला की मदद करना सेवा है।’ तो, जिन लोगों ने यह किस्सा सुना, वह ऐसे व्यक्तियों की तलाश में सड़क पर निकल पड़े, जो कि सड़क पार करने की कोशिश कर रहे हों। लेकिन उन व्यक्तियों ने कुछ उल्टा ही कर डाला। वह बुजुर्गों के पास जाकर पूछते, ‘क्या आपको सड़क पार करनी है?’ बुजुर्ग सड़क पार करने से इनकार कर देते। लेकिन फिर भी एक व्यक्ति ने जबरदस्ती बुजुर्ग का हाथ पकड़कर उन्हें जबरदस्ती सड़क पार करवा दी।

सड़क के दूसरी पार पहुंची बुजुर्ग महिला थोड़ी ही आगे चली थी कि एक और शख्स ने आकर पूछा, ‘क्या आपको सड़क पार करनी है?’ बुजुर्ग ने दोबारा कहा, ‘नहीं’। इस पर उस व्यक्ति ने कहा, ‘नहीं, नहीं! सड़क तो आपको पार करनी ही पड़ेगी। मुझे सेवा करनी है।’ तो उस बेचारी बुजुर्ग महिला को लोग सड़क पर इधर से उधर ही घुमाते रहे। ऐसा चार-पांच बार हुआ तो महिला डर गई। तो, यह सेवा नहीं है। सेवा का मतलब है- बदले में कुछ पाने की भावना रखे बिना किसी व्यक्ति के लिए कुछ करना।