मंगलोर में शुद्ध मन के साथ स्वच्छ गांवों का निर्माण

▶ मंगलोर में एमआरपीएल के आसपास के 9 गांवों को इस प्रोजेक्ट से लाभ मिलेगा। इसके कार्य हैं - लड़कियाें को मासिक धर्म के संबंध में स्वच्छता को लेकर प्रशिक्षण देना, मंदिरों मंे सूखा कचरा प्रबंधन के कार्य को बढ़ावा देना और सामुदायिक शौचालय निर्माण कार्य द्वारा बुनियादी ढांचे की रचना।

     मंगलोर (कर्नाटक)। द आर्ट ऑफ लिविंग के तत्वावधान में व्यक्ति विकास केंद्र इंडिया (वीवीकेआई) मंगलोर रिफाइनरी पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) के सहयोग से मंगलोर में समुदाय संचालित सतत स्वच्छता कार्यक्रम को चला रहा है। इसका नाम है शुभ्र ग्राम, शुद्ध मानसु। नवंबर 2017 में इस परियोजना की शुरुआत में स्वच्छता पर ध्यान देने के साथ ही क्षेत्र की जरूरतें समझने के लिए एक रैपिड रूरल अप्रेजल (आरआरए) सर्वेक्षण आयोजित किया गया था। ताकि स्वच्छता एवं सफाई को केंद्र में रखकर क्षेत्र की जरूरतें समझी जा सकें।

यह सर्वेक्षण वीवीकेआई की एक बहुभाषी टीम द्वारा किया गया था। इसके तहत मंगलोर की 9 ग्राम पंचायतें जैसे कि मंगलोर, माद्या, सुरिन्जे, डेलन्थाबेट्टु, पर्मूड, कलवार, चेलिरु, कुटेहुर, बाला और जोकाटे आदि कवर की गई थी। ग्रामीणों के साथ गहन साक्षात्कार एवं वार्तालाप द्वारा आरआरए टीम ने परिमाणात्मक एवं गुणात्मक शोध कार्य करते हुए उचित ब्योरा एकत्रित किया। इस क्षेत्र की केटेल मंदिर, कुक्केसुब्रमण्य मंदिर, मंगलादेवी मंदिर और कादरी सहित चार मंदिरों में जैविक अपशिष्ट खाद इकाइयां स्थापित करने की कार्य योजना तैयार है।

मंगलोर के कालीपट्टा में मंदिर निर्माण की सहमति मिल गई है। लगभग 60 विद्यालय ऐसे चुने गए हैं, जहां आर्ट आॅफ लिविंग के प्रोजेक्ट पवित्रा के तहत वयस्क कन्याओं को मासिक धर्म संबंधी स्वच्छता एवं स्वास्थ्य के बारे में बताया जाएगा। मंगलोर में इसका प्रशिक्षण देने के लिए 2-3 महिलाओं के 6 समूह समुदाय स्वास्थ्य प्रशिक्षक के रूप मंे प्रशिक्षित किए गए हैं। अभी तक 8 विद्यालयों में 200 से अधिक लड़कियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।