ज्ञान के मोती

अंधकार पर प्रकाश की विजय का उत्सव है दीपावली

संसार में रहो लेकिन सांसारिक भौतिकता में मत डूबे रहो

     तेल का दीपक जलाने के लिए सबसे जरूरी क्या है? बाती तेल में डूबी रहती है, लेकिन प्रकाशित होने के लिए उससे बाहर भी रहती है। अगर पूरी की पूरी बाती तेल में ही डूबी रहे तो प्रकाश फैलाना संभव ही नहीं। जीवन भी दीपक और बाती के समान है। आपको संसार में रहना है लेकिन उसमें डूबे बिना। यानी निर्लिप्त भाव से। आप अगर सांसारिक भौतिकता में डूबे तो जीवन में आनंद और ज्ञान प्राप्त नहीं कर पाएंगे। संसार में रहकर भी सांसारिक भौतिकता के प्रति निर्लिप्त रहने पर ही आप आनंद और ज्ञान की ज्योति बनकर प्रकाश फैला सकते हैं। दीपावली के दिन दीपक जलाने का उद्देश्य मात्र घरों की सजावट करना नहीं है, बल्कि उक्त सत्य को उद्भाषित करना भी इसका एक लक्ष्य है।

दीपक प्रत्येक मानव के अंदर समाहित सद् गुणों का प्रतीक है

     प्रत्येक मनुष्य में कोई न कोई सद्गुण अवश्य होता है। आपकी ओर से जलाया जाने वाला हर दीपक इसी बात का प्रतीक है। अपने भीतर ज्ञान का दीपक जलाकर आप अपने भीतर के अव्यक्त मूल्यों को उद्भाषित करते हैं। और ज्ञान प्राप्त करके आप अपने अस्तित्व के विभिन्न पहलुओं के प्रतिजागरूक होते हैं। इन्हें जब भी प्रकाशित किया जाता है, तभी दीपावली हो जाती है। मात्र एक दीपक जलाकर संतुष्ट मत होइए। हजारों दीपक जलाइए, क्योंकि अज्ञानता का अंधकार मिटाने के लिए बहुत से दीपक जलाने की आवश्यकता है।

पटाखे - दबी हुई इच्छाओं में विस्फोट

     दीपावली से ही जुड़ा हुआ एक और प्रतीक हैं पटाखे। अपने जीवन में प्राय: भावनाओं, कुंठा और गुस्सेको दबाने से आप फटने के लिए तैयार पटाखे में तबदील हो जाते हैं। जब आप अपनी भावनाओं, तृष्णा, घृणा और चिंता को दबाते रहते हैं तो आप फटने के बिंदु के नजदीक पहुंच जाते हैं। पटाखे फोड़ना एक मनोवैज्ञानिक कवायद है। यह एक साथ जमा होकर उबल रही भावनाओं को निकालने का संकेत देता है। जब आप बाहर कोई विस्फोट देखते हैं तो आपके अंदर भी ठीक इसी प्रकार की संवेदनाएं झंकृत होती महसूस होती हैं। विस्फोट के साथ एकाएक बहुत ज्यादा प्रकाशहोता है। इन सारी दबी हुई भावनाओं को िनकल जाने दें, ताकि शांति का प्रवाह शुरू हो। भूतकाल के पश्चातापों को भूल जाएं। भविष्य की चिंताओं को भी छोड़ दें। वर्तमान के क्षणों को भरपूर तरीके से जीने का आनंद लें।

Maintaining awareness in the midst of celebrations

     Sweets and gifts symbolize the dispelling of the bitterness and renewal of friendship. Deepawali is a time to throw light on the wisdom you have gained and welcome a new beginning. When true wisdom dawns, it gives rise to a celebration. But don’t let celebration make you lose your focus and awareness. To maintain awareness in the midst of celebrations, the ancients created rituals: puja brings sacredness. For the same reason, Deepawali is also the time for pujas that add depth to the festivities by infusing the spiritual aspect.

     The celebration includes the spirit of seva or service. Share. In giving, we receive. The celebration also means dissolving all differences and basking in the glory of the Atman. Happiness and wisdom have to be spread and that can happen when all come together and celebrate in knowledge. 

     Light the lamp of love in your heart; the lamp of abundance in your home; the lamp of compassion to serve others; the lamp of knowledge to dispel the darkness of ignorance and the lamp of gratitude for the abundance that the Divine has bestowed on us.