किन्नर समुदाय के लोगों ने सीखी स्वीकार्यता की कला

     बंगलोर (कर्नाटक)। अपने ही परिवारों द्वारा बहिष्कृत, अकेले, कमजोर और समाज में अत्यंत भेदभाव का सामना करने वाले किन्नर समुदाय के लोग प्रायः भय, शर्म, लैंगिक भेदभाव, सामाजिक दबाव, अवसाद, आत्महत्या की प्रवृत्ति तथा समाज के लिए कलंक जैसी दुर्भावनाओं से हमेशा घिरे रहते हैं। सुदर्शन क्रिया द्वारा किन्नर अपनी समस्याओं से निजात पा सकते हैं।

यह सोचकर आर्ट आॅफ लिविंग की प्रशिक्षिका श्वेता व्यास किन्नरों के उत्थान के लिए काम कर रही है। किन्नरों के लिए आर्ट आॅफ लिविंग का हैप्पीनेस प्रोग्राम आयोजित करने का प्रस्ताव लेकर वह इस समुदाय के लिए काम करने वाली पेरीफेरी नाम की सामाजिक संस्था के पास पहुंचीं। पेरीफेरी की नीलम जैन एवं पायल अग्रवाल ने श्वेता के साथ मिलकर इस कार्यक्रम की व्यवस्था की।

इसके परिणामस्वरूप तमिलनाडु के किन्नर समुदाय के 18 लोग हैप्पीनेस प्रोग्राम में भाग लेने के लिए आर्ट आॅफ लिविंग के बेंगलुरू स्थित अंतरराष्ट्रीय केंद्र में पहुंचे। श्वेता कहती हैं कि भावनात्मक बोझ तले दबे इस समुदाय को हैप्पीनेस कार्यक्रम की बहुत ज्यादा जरूरत है। प्रतिदिन तिरस्कृत एवं परखे जाने की प्रक्रिया से गुजरना बहुत कठिन होता है। अब पेरीफेरी के साथ मिलकर नियमित काम करंेगे। स्थानीय स्तर पर इस समुदाय को शिक्षित करने की योजना भी बना रहे हैं।

एक मुट्ठी मुस्कान ...

कुरुक्षेत्र (हरियाणा)। आर्ट ऑफ लिविंग कुरुक्षेत्र परिवार ने एक अनोखा सेवा प्रोजेक्ट शुरू किया है। इसका नाम है ‘एक मुट्ठी मुस्कान’। हरियाणा के पूर्व आर्ट आॅफ लिविंग के अपेक्स सदस्य सुदर्शन अग्रवाल का कहना है कि सभी स्वयंसेवकों ने प्रत्येक दिन भोजन पकाने से पहले उसमें से मुट्ठीभर अनाज और दालें निकालकर अलग रखने का फैसला किया है। इस तरह एकत्रित हुआ अनाज और दालें महीने में एक या दो बार जरूरतमंदों को दी जाएंगी।

प्रोजेक्ट लॉन्च करने के लिए मकर संक्रांति से बेहतर दिन और कौनसा हो सकता है? मकर संक्रांति ऐसा दिन है, जिस दिन लोगों को खिचड़ी खिलाना काफी शुभ माना जाता है। स्वयंसेवकों ने 15 जनवरी, 2019 को हरियाणा के पलवल की मलिन बस्तियों का दौरा किया और झुग्गियों में रहने वालों को खिचड़ी बनाकर गर्मागरम खाना परोसा गया। बच्चों और वयस्कों दोनों को उबली हुई मूंगफली भी दी गई। भूखे चेहरों पर रोशनी का नजारा स्वयंसेवकों के दिल को सुकून देने के लिए पर्याप्त था।