आइए विशेषज्ञों से सीखे

• बहती नदियों के पीछे के व्यक्ति से मिलिए
• पूरा जियो हाइड्रोलॉजिकल परिदृश्य बदल रहा है। जलवायु में चरम परिवर्तन आ रहे हैं। इसी समय अकाल और बाढ़ भी एक साथ हो रहे हैं।
• इससे पहले भी मैं अपने प्रस्ताव को बड़े रूप में प्रस्तुत कर चुका हूं क्योंकि कुछ भी असंभव नहीं है।

     डाॅ. लिंगराजू याल भार े त के सबसे सम्मानीय और अनुभवी जियोलॉजिस्ट हैं। वह कर्नाटक के रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर और उसके बाद राज्य सरकार के जियोमेटिक सेंटर, वाटर रिसोर्स डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन में डायरेक्टर के तौर पर काम कर चुके हैं। उनका करियर 5 दशकों से दैदिप्यमान है। डाॅ. याले समझते हैं कि जिस समय में विश्व जलवायु संकट के दौर से गुजर रहा है, ऐसे में वह सेवानिवृत्त होकर नहीं रह सकते। ऐसे में वह गुरुदेव श्री श्री रविशंकर और आर्ट आॅफ लिविंग के साथ अपने विजन को साझा करके एक नया अध्याय आरंभ करने में लग गए। आर्ट ऑफ लिविंग के नदी पुनरुत्थान प्रोजेक्ट के राष्ट्रीय निदेशक के तौर पर काम कर रहे डाॅ. लिंगराजू याले के साथ डाॅ. हम्पी चक्रवर्ती ने विस्तार से बातचीत की। प्रस्तुत हैं बातचीत के चुनिंदा अंश..

■ नदियों के पुनरुत्थान कार्य के लिए आर्ट आॅफ लिविंग का अनूठा दृष्टिकोण क्या है?

नदी पुनरुत्थान एक बहुआयामी प्राकृतिक विषय है। सभी प्राकृतिक स्रोत प्रकृति से जुड़े हुए हैं। आर्ट आॅफ लिविंग में हम प्राकृतिक तरीके से ही समाधान खोजते हैं। हम सभी धारणाओं के बारे में सोचते हैं। चाहे वह वनस्पति हो या मृदा क्षरण, भूमिगत जल स्तर को ऊंचा उठाना हो या सतह के पानी के भराव की बात हो। अनेक प्रकार के विभाग हैं जो अलग-अलग विषयों पर कार्य करते हैं। हमारे लिए कोई समस्या नहीं है। हमारा दृष्टिकोण नवीनता से काम करना है। हम प्राकृतिक बायोलाॅजिकल इंजीनियरिंग के रूप में काम करते हैं, जो हमारे पास सदियों से उपलब्ध है। इन सबसे ऊपर हमारे पास कार्य करने वाली एक बहुत बड़ी सेना है, जो सेवा भावना से काम करती है और गुरुदेव श्री श्री रविशंकर के मानवीय मूल्यों के प्रशिक्षण को ध्यान में रखकर कार्य करती है।

■ आप कार्य करने के लिए प्रोजेक्ट का चुनाव कैसे करते हैं?

जल संकट और प्रदूषण का फैलाव बहुत विशाल है। आप कहीं भी जाएं आपको इस प्रकार के प्रोजेक्ट की आवश्यकता है। लेकिन हम प्राथमिकता के अनुसार मापदंड तय करते हैं और उसके बाद कार्य निर्धारण करते हैं। सबसे पहले मैं देखता हूं कि स्थानीय लोग और स्थानीय प्रशासन हमारे प्रोजेक्ट में किस प्रकार और कितने रुचिकर हैं। क्यांेकि वह लोग ही हमारे प्रोजेक्ट के लंबे समय तक बने रहने का कारण बनेंगे। दूसरा यह कि समस्या का रूप कितना विराट है। तीसरा, हमारे पास कितने आंकड़े उपलब्ध हैं, चाहे वे सरकार की तरफ से हों या अन्य संस्था से। चौथा ऐसे लोगों की उपलब्धता, जो हमारे प्रोजेक्ट के लिए आर्थिक सहायता पैदा कर सकते हैं और फंडिंग एजेंसियों का रुख क्या है। हर प्रोजेक्ट के लिए प्रचुर धन की जरूरत होती है। जब यह सारे काम सही हो जाएं तो हम आगे के कार्य के लिए बढ़ते हैं।

■ नदियाें के पुनरुत्थान दल के लिए आवश्यक सदस्य कौन हैं?

दल में अलग-अलग विषयों के विषेशज्ञ होते हैं, जो कार्य योजना बनाते हैं। उसके बाद वह व्यक्ति होते हैं, जो योजना को समझकर अमल में लाते हैं और आगे बढ़ाते हैं।

■ दल को प्रेरित कैसे रखा जाता है?

यह अपने आप होता है (हंसते हुए)। मेरे अनुभव के अनुसार इस क्षेत्र में वो ही लोग आते हैं, जो कुछ अलग करना चाहते हैं और हमारे साथ कार्य करने के अवसर खोजते हैं। आध्यात्मिकता लोगांे के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाती है और वह आगे बढ़ते रहते हैं। इससे ज्यादा वे मुझसे प्रशिक्षण लेते हैं, जिससे वे प्रेरित होते रहते हैं।

■ जब आप कार्य कर रहे होते हैं तो किस प्रकार की चुनौतियों का सामना करते हैं और उनका समाधान कैसे करते हैं?

मैं हर कार्य को यह सोचकर करता हूं कि यह तो हो सकता है। लेकिन जब अपने प्रयासों का विस्तार करता हूं और इसे पूरे देश में ले जाना चाहता हूं तो मेरे सामने कई चुनौतियां आती हैं। हमारी कार्य योजना अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार बदलती रहती है। मुझे अन्य व्यक्तियों की आवश्यकता होती है, जो शोध कर सकते हों और नएनए तरीकों का अविष्कार कर सकते हों। बहुत से कार्य रिमोट संेसिंग से हो जाते हैं, लेकिन फिर भी बहुत से कार्य ऐसे होते हैं, जो निरीक्षण के आधार पर धरातल के स्तर पर करने पड़ेते हैं। उनके लिए हमें विशेष औजारों की आवश्यकता होती है। चूंकि यह दीर्घकालीन प्रोजेक्ट होते हैं, तो हमें उन्हें एकदम सही तौर पर प्रयोग करना होता है। हमें अपनी प्रगति पर दृष्टि जमाए रखनी पड़ती है। इन सबके लिए हमें पर्याप्त धन की आवश्यकता होती है। इसके लिए सरकार की रुचि और काॅर्पोरेट्स की सहायता चाहिए होती है।

■ इस कार्य में सहयोग करने के लिए समुदाय को कैसे लाया जाता है?

हम लोगों के पास जाते हैं और उन्हें बताते हैं कि उनकी नदियां, तालाब और नलकूप क्यों सूख रहे हैं। इससे उनमें रुचि का जन्म होता है। इसके बाद जब उन्हें यह बताया जाता है कि हम किस प्रकार उनकी सहायता कर सकते हैं तो वह सभी प्रसन्न हो जाते हैं। आर्ट आॅफ लिविंग की प्रक्रिया ऐसी है, जो समुदाय में एकता लाती है और उन्हें कार्य करने के लिए प्रेरित करती है। नव चेतना शिविर, बाल चेतना शिविर और यूथ लीडरशीप ट्रेनिंग प्रोग्राम इस दिशा में बहुत बढ़िया काम करते हैं।

■ नदियों के पुनरुत्थान से जुड़े महत्वपूर्ण लोगों को यह समझाने कि वह आध्यात्मिक और तकनीक का कार्य कर रहे हैं, में सांस्कृतिक संदर्भकिस प्रकार भूमिका निभाते हैं?

आध्यात्मिकता एकता में बांधने का कार्य करती है। हम चाहे कोई भी वैज्ञानिक या तकनीकी योजना बनाएं, उनके क्रियान्वयन में समुदाय की सहभागिता आध्यात्मिकता के कारण ही होती है। योजनाएं पूरी करने में इसी समुदाय की सहभागिता का अहम योगदान रहता है।

■ आपके लिए सबसे बड़ी सीख क्या है?

कुछ भी असंभव नहीं है। मैं इस आत्मविश्वास के साथ यहां पर नहीं आया था कि मैं इतने बड़े प्रोजेक्ट संभाल सकता हूं। यदि आप मेरे पहले के प्रोजेक्ट देखें तो वे बहुत ही विनम्र थे। लेकिन अब मैं सोचता हूं कि मुझे और बड़े प्रोजेक्ट लेने चाहिए। क्योंकि यह संभव है।

■ अगले 5 सालों के लिए आपका क्या दृष्टिकोण है?

बहुत कुछ करना है। हमें भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर तरीकों को और सरल बनाना है। हमें नदियों के मुहानों को और परखना है। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि हमने आज तक जो किया है, उसको उन्हीं क्षेत्रों में और तेज गति से दोहराना है।